उत्तराखण्ड
हेमभट्ट पर हमला लोकतंत्र के चौथे पांये पर हमला है, धामी जवाब तो बनता है…
सीएन, नैनीताल। भारत टीवी के पत्रकार हेमभट्ट सामाजिक सरोकारों से जुड़ी पत्रकारिता का दायित्वनिर्वहन निष्ठापूर्वक कर रहे हैं! लेकिन यह सरकार को खटक रहा है सच कभी झुकता नही..सवाल पूछे ही जायेंगे। धामी जी सवाल तो बनता ही है। वरिष्ठ पत्रकार हेमभट्ट को अँधेरे में घर से, परिजनों को डराते हुए अभद्रता के साथ एक आतंकवादी की तरह उठाना वो भी देहरादून में जहाँ पूरी सरकार मौजूद है, पुलिस महकमे के मुखिया जहां बैठते हैं, जो राज्य जनसंघर्षों की बदौलत बना उसके लिए एक बहुत ही ख़तरनाक संकेत है! लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति के लिए पर्याप्त स्थान विरोधी पक्ष की भूमिका को स्वीकारने के कारण ही इसकी महत्ता है! देश का संविधान में विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को आवश्यकीय मानता है, इसलिए इन्हें मूल अधिकारों में समाहित किया गया है! लोकतंत्र एक नियम आधारित लोकलाज से चलने वाली व्यवस्था है,जिसकी अवहेलना लोकतंत्र की आत्मा को खोखला कर देती है! विचार अभिव्यक्ति की आज़ादी को ताक़त के बल पर दबाने की प्रवृत्ति से सत्ता प्रातिष्ठान बाज़ आये यह किसी भी प्रकार से सहन नहीं किया जाएगा! इस प्रकरण में तुरंत रिहाई के साथ ही एक उच्च स्तरीय पारदर्शी जाँच के माध्यम से ज़िम्मेदारी सुनिश्चित करते हुए कड़ी कार्रवाई की जाए!
कलम का काम तो है बेज़ुबानों का जबां देना,
कलम से तो ज़ुल्म के तलवे सहलाये नहीं जाते!






































