नैनीताल
डीएफओ, डीएम, आयुक्त कार्यालय के सामने वीरभट्टी के जंगलों में सात घंटों से धधकती रही आग लेकिन बुझाने कोई नही पहुंचा
सीएन, नैनीताल। वनाग्नि काल में प्रशासनिक मशीनरी कि काहिली ही कही जायेगी कि नैनीताल मंडल मुख्यालय स्थित डीएफओ, डीएम, आयुक्त कार्यालय के सामने वीरभट्टी के जंगलों में सात घंटों से आग धधकती रही है लेकिन बुझाने कोई नही पहुंचा। नगरपालिका नैनीताल के पूर्व उपाध्यक्ष डीएन भट्ट ने बताया कि आज रविवार को दिन में करीब एक बजे जगल की आग बीरभट्टी पुल के पास अल्मोड़ा जाने वाले राजमार्ग से शुरु हुई। नैनीताल प्रभागीय वनाधिकारी के कार्यालय से आग स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। सात घंटे से अधिक का समय व्यतीत होने के बाद भी जिलाधिकारी एवं आयुक्त कार्यालय से जिसकी हवाई दूरी एक किलोमीटर भी नहीं है वह निरंतर धधक रहा है। अब प्रश्न यह उठता है कि मंडल मुख्यालय के महज एक किमी के दायरे में आग बुझाने के लिए कोई अधिकारी व कर्मचारी उपलब्ध नही है तो दूरदराज के इलाकों का क्या हाल होगा। वनाग्नि रोकने को शासन प्रशासन द्वारा अखबारों में खूब इश्तहार दिये जाते हैं। कर्मचारियों को रिहर्सल करवाई जाती है। जनजागरण किया जाता है। लेकिन यह धरातल में कही नही दिखाई देता है। लापरवाही का नतीजा यह है कि उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में कई स्थानों में जंगल आग की चपेट में हैं। वन्य संपत्ति को भारी नुकसान हो रहा है लेकिन जिम्मेदार लोग आग से उठ रहे धुएं के गुबार को देखने में मस्त है। नैनीताल मुखयालय के सटे वीरभट्टी के जंगल बीते सात घंटे से धधक रहा है लेकिन इस आग को बुझाने की जहमत नही उठाई जा रही है। शासन प्रशासन की घोर काहिली की यह बानगी भर है। इस काहिली पर यही कहा जा सकता है कि जब रोम जल रहा था तो नीरो बंशी बजा रहा था।









































