उत्तराखण्ड
कुमाऊं के 775 गांवों की आस्था का केंद्र है देवीधुरा का पाषाण युद्ध, पुरातन स्वरूप से छेड़छाड़ किए बिना होंगी मेले की व्यवस्थाएं
सीएन, लोहाघाट। परमाणु युग में भी उत्तराखंड के जनपद चम्पावत के देवीधुरा स्थित मां बाराही धाम का प्रसिद्ध पाषाण युद्ध यानी “आषाढ़ी कौतिक” अपनी सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं को जीवंत रखे हुए है। इस बार मेले की सभी व्यवस्थाएं श्री बाराही मंदिर ट्रस्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार संचालित की जाएंगी। मेले के पुरातन स्वरूप और धार्मिक परंपराओं से किसी प्रकार की छेड़छाड़ किए बिना अन्य व्यवस्थाओं को विधि-विधान के अनुसार पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है। श्री बाराही मंदिर ट्रस्ट के संस्थापक अध्यक्ष, रेलवे कॉरिडोर में महानिदेशक रह चुके तथा वेद-पुराणों एवं धार्मिक क्रियाकलापों के जानकार हीरा बल्लभ जोशी का कहना है कि उत्तर भारत में मां बाराही का यह ऐसा विशिष्ट धाम है, जिसकी अलौकिक मान्यताएं और अनूठी धार्मिक परंपराएं सदियों से चली आ रही हैं। उन्होंने बताया कि शताब्दियों पूर्व यहां के पूर्वजों ने कुमाऊं के विभिन्न क्षेत्रों और सभी वर्गों के लोगों को मां बाराही की पूजा में शामिल किया। इसके पीछे समाज में सामाजिक समरसता, भाईचारा और एकता बनाए रखने की भावना रही होगी। हीरा बल्लभ जोशी के अनुसार बाराही धाम की बग्वाल केवल पत्थरों के युद्ध तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरी धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। मान्यता है कि बग्वाल के दौरान यक्ष, गंधर्व, योगिनी और डाकिनी जैसी अदृश्य शक्तियां भी इसमें शामिल होती हैं। मां के सिंहासन-डोले को उठाने वाले लोगों के साथ गाजे-बाजे वाले, डागर, जागरिया, द्यौंक, पुजारी, ढोली, छुड़ैल और हुड़किया आदि पर मां बाराही की शक्ति का संचार होता है और वे भक्ति में पूरी तरह लीन हो जाते हैं। श्रद्धालु उन पर अक्षत और पुष्पों की वर्षा कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। उन्होंने बताया कि मां बाराही की पूजा में कुमाऊं के 775 गांवों के लोगों की पारंपरिक भागीदारी है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी यह परंपरा आगे बढ़ती आ रही है। मेले के दौरान इन सभी लोगों को मां बाराही के ‘दूत’ के रूप में माना जाता है। इस अवधि में परंपरा से जुड़े लोग सात्विक जीवन व्यतीत करते हैं और तामसिक पदार्थों का सेवन वर्जित माना जाता है। आगामी रक्षाबंधन पर्व पर आयोजित इस मेले की तैयारी जोरशोर से शुरू हो गई है।












































