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पाकिस्तान के खिलाफ विद्रोह कर बैठी पीओके की जनता, कर रही गुरिल्ला युद्ध

पीओके में आटा जैसी जरूरी चीजें खरीद पाना लोगों के बस में नहीं रह गया, लोगों में गुस्सा
सीएन, मुजफ्फराबाद।
पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर पीओके में पिछले चार दिनों से युद्ध का मैदान बना हुआ है। पाकिस्तानी प्रशासन के अत्याचार के खिलाफ आम लोग सड़कों पर उतर आये हैं और पूरा पीओके हिंसा की आग में जल रहा है। पाकिस्तान ने विरोध को दबाने के लिए हिंसक दमन शुरू कर दिया है और पाकिस्तानी सेना निहत्थे लोगों पर गोलियां चला रही है। पाकिस्तानी रेंजर्स की गोलीबारी में चार आम नागरिकों की मौत हुई है। बावजूद इसके पीओके में विरोध प्रदर्शन कम होने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने सब्सिडी पैकेज का लालच देकर मनाने की कोशिश की लेकिन घाटी के लोगों ने इस्लामाबाद के झांसे में आने से साफ इनकार कर दिया है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में लोगों का गुस्सा अचानक नहीं फूट पड़ा, इसकी आग काफी समय से सुलग रही थी, जो अब भड़क उठी है।पाकिस्तान इस समय इतिहास के सबसे बड़े आर्थिक संकट से जूझ रहा है। पिछले साल गर्मियों में पाकिस्तान दिवालिया होने ही वाला था लेकिन आखिरी समय में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से मिले बेलआउट पैकेज ने उसे बचा लिया। भारत के साथ व्यापार बंद होने के बाद पाकिस्तान में व्यापारियों का एक बड़ा वर्ग बर्बाद हो चुका है। कंगाल पाकिस्तान के पास अब लोगों को दी जाने वाली सब्सिडी भी बंद कर दी है। दूसरी तरफ उसने वसूली के नए.नए तरीके निकाले हैं। बिजली और पेट्रोलियम उत्पादों के दाम आसमान छू रहे हैं। पीओके में स्थिति और भी खराब है क्योंकि कंगाल पाकिस्तान पहले अपने सूबों को संभालने में लगा है और उसने अपने कब्जे वाले कश्मीर में लोगों को अपने हाल पर छोड़ दिया है। पीओके में आटा जैसी जरूरी चीजें खरीद पाना लोगों के बस में नहीं रह गया है। बिजली की बढ़ी कीमतों ने लोगों को बेहाल कर रखा है। ये हाल तब है जब पाकिस्तान पीओके के अंदर बिजली का उत्पादन करता है। लेकिन ये बिजली पीओके के लोगों को दिए जाने के बजाय पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में पहुंचा दी जाती है। इन सब चीजों को लेकर आम जनता के मन में काफी समय से उबाल था। इस बीच पाकिस्तान सरकार ने एक नया टैक्स जारी कर दिया। इन सबके विरोध में पीओके में व्यापारियों के संगठन जम्मू कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी ने शनिवार को एक हड़ताल बुलाई थी। हड़ताल से पाकिस्तानी प्रशासन इतना घबरा गया कि उसने एक दिन पहले शुक्रवार को ही जवानों को भेजकर अवामी एक्शन कमेटी के 70 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया। इसकी जानकारी मिलते ही लोग भड़क उठे और सड़कों पर उतर आए।

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