अंतरराष्ट्रीय
आज 12 अगस्त 2026 को साल का अंतिम सूर्यग्रहण, भारत में नही दिखेगा, सूतक काल मान्य नहीं…..
सीएन, नैनीताल। हरियाली अमावस्या के दिन 12 अगस्त 2026 को साल का दूसरा व साल का अंतिम सूर्यग्रहण लगने जा रहा है। यह खगोलीय घटना कई देशों में पूर्ण और आंशिक रूप से दिखाई देगी, जबकि भारत में यह ग्रहण दृश्य नहीं होगा। सूर्य ग्रहण की घटना को हमेशा से खगोल विज्ञान और धार्मिक नजरिए से खास माना जाता रहा है। 12 अगस्त 2026 को साल का दूसरा सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। इससे पहले साल का पहला सूर्य ग्रहण फरवरी के महीने में लगा था। साल का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 को लगेगा। श्रावण मास की हरियाली अमावस्या को यह ग्रहण लगेगा। हिंदू पंचांग के अनुसार यह सूर्य ग्रहण श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि पर लगेगा। यह सूर्य ग्रहण कर्क राशि में लगेगा जहां पर गुरु भी मौजूद होंगे। भारत को छोड़कर उत्तरी अमेरिका, अफ्रीका, यूरोप आर्कटिक, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन में दिखाई देगा। भारतीय समयानुसार ग्रहण रात 11.30 बजे के समय घटित होगा, इसलिए यह भारत में दिखाई नहीं देगा। शास्त्रों के अनुसार, जो ग्रहण दृश्य नहीं होता, उसका धार्मिक प्रभाव और सूतक काल मान्य नहीं होता है। ज्योतिषाचार्यो के अनुसार, भारत में इस दिन हरियाली अमावस्या पर स्नान, दान, पितृ तर्पण, वृक्षारोपण और भगवान शिव की पूजा सहित सभी धार्मिक अनुष्ठान बिना किसी बाधा के सामान्य रूप से किए जा सकेंगे। मंदिरों के कपाट खुले रहेंगे. यह एक लंबा वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा, जिसमें चंद्रमा सूर्य को ढकेगा और आसमान में ‘रिंग ऑफ फायर’ (अग्नि का छल्ला) का सुंदर दृश्य बनेगा। पूर्ण सूर्य ग्रहण: स्पेन, आइसलैंड, ग्रीनलैंड, रूस और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों में पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई देगा, जिससे दिन में भी अंधेरा छा जाएगा। स्पेन की मुख्य भूमि पर यह 100 से अधिक वर्षों बाद दिखने वाला पहला पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा। आंशिक सूर्य ग्रहण: शेष यूरोप, उत्तरी अमेरिका और पश्चिमी अफ्रीका के बड़े हिस्सों में यह आंशिक रूप से वर्षा, बाढ़ और भूकंपन के योग बन रहे हैं। भारत के मध्य और दक्षिण-पूर्वी राज्यों (विशेषकर तेलंगाना और आंध्र प्रदेश) में भारी बारिश हो सकती है। वैश्विक स्तर पर राजनीतिक अस्थिरता, सीमा पर तनाव, छात्र आंदोलन और प्रदर्शन की स्थितियां बन सकती हैं। आर्थिक व सामाजिक परिणाम में व्यापार में तेजी आएगी, बीमारियों में कमी होगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और व्यक्तिगत आय में इजाफा होगा।





























