राष्ट्रीय
पंत जयंती पर विशेष : जब गोविंद बल्लभ पंत ने काकोरी कांड के नौजवानों को बचाने के लिए जान की बाजी लगा दी, हिमालय की तरह अडिग राजनेता…..
चन्द्रेक बिष्ट, नैनीताल। भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत की जयंती आज 10 सितंबर को पूरे देश में मनाई जा रही है। हिम पुत्र के नाम से पहचाने जाने वाले भारत रत्न गोबिंद बल्लभ पंत ने न केवल स्वतंत्रता आंदोलन में अहम भूमिका निभाई बल्कि उसके बाद पूर्वी और पश्चिमी पाकिस्तान से भारत पहुंचे लोगों को बसाने में भी अपना अहम योगदान दिया। वह हिमालय की तरह अडिग थे। भारतीय संविधान में हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिलाने और जमींदारी प्रथा को खत्म कराने में गोविंद बल्लभ पंत का महत्वपूर्ण योगदान था। गोविंद बल्लभ पंत उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री एवं स्वतंत्रता सेनानी थे। बाद में वह देश के गृह मंत्री भी बने। भारतीय संविधान में हिंदी को राजभाषा का दर्जा दिलाने और जमींदारी प्रथा को खत्म कराने में उनका महत्वपूर्ण योगदान था। इनके गृह मंत्री रहते ही भारत रत्न सम्मान देने की शुरुआत की गयी। बाद में यही सम्मान उन्हें स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने के उपलक्ष्य में राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद द्वारा प्रदान किया गया। गोविंद बल्लभ पंत का जीवन सार्वजनिक जीवन में एक मिसाल के तौर पर देखा जाता रहा है। गोविंद बल्लभ पंत का जन्म 10 सितंबर, 1887 में अल्मोड़ा जिला के खूंट गांव में हुआ था। गोविंद बल्लभ पंत महात्मा गांधी के जीवन दर्शन को अपनी आत्मिक ऊर्जा का स्रोत मानते रहे। शुरुआती शिक्षा अल्मोड़ा में ग्रहण करने के बाद वर्ष 1905 में गोविंद बल्लभ इलाहाबाद चले गये और 1907 में वकालत की डिग्री ली। इसके बाद 1910 में वापस अल्मोड़ा लौटे, जहां उन्होंने वकालत शुरू की। 9 अगस्त, 1924 को उत्तर प्रदेश में काकोरी कांड के नौजवानों को बचाने के लिए उन्होंने जान की बाजी लगा दी। इनकी वकालत का सभी लोग लोहा मानते थे। गोविंद बल्लभ पंत गांधीजी के अनन्य समर्थक होने के साथ-साथ क्रांतिकारी विचारधारा वाले स्वतंत्रता सेनानियों के भी मित्र थे। इस दौरान वे नैनीताल से स्वराज पार्टी के लेजिस्लेटिव काउंसिल के सदस्य थे। 1927 में राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ और उनके तीन अन्य साथियों को फांसी के फंदे से बचाने के लिए उन्होंने भरसक प्रयास किया। इस दौरान उन्होंने साइमन कमीशन बहिष्कार और नमक सत्याग्रह आंदोलन में भी भाग लिया और इसी वजह से मई 1930 में देहरादून जेल भी जाना पड़ा। गोविन्द बल्लभ पंत का मुकदमा लड़ने का ढंग निराला था, जो मुवक्किल अपने मुकदमों के बारे में सही जानकारी नहीं देते थे। पंत उनका मुकदमा नहीं लेते थे। अंग्रेज मजिस्ट्रेट की आपत्ति होने के बावजूद एक बार वे काशीपुर कोर्ट में धोती, कुर्ता तथा गांधी टोपी पहन कर चले गये थे। देश की आजादी के बाद गोविंद बल्लभ पंत 26 जनवरी, 1950 को उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बने। गोविन्द बल्लभ पंत का मुक़दमा लड़ने का ढंग निराला था, जो मुवक़्क़िल अपने मुक़दमों के बारे में सही जानकारी नहीं देते थे, पंत जी उनका मुक़दमा नहीं लेते थे। काशीपुर में एक बार वे धोती, कुर्ता तथा गाँधी टोपी पहनकर कोर्ट चले गये। वहां अंग्रेज़ मजिस्ट्रेट ने आपत्ति की।.गोविंद बल्लभ पंत उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री एवं स्वतंत्रता सेनानी थे। इनका मुख्यमंत्री कार्यकाल 15 अगस्त, 1947 से 27 मई, 1954 तक रहा। बाद में ये भारत के गृहमंत्री भी (1955 -1961) बने। भारतीय संविधान में हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलाने और जमींदारी प्रथा को खत्म कराने में उनका महत्वपूर्ण योगदान था। भारत रत्न का सम्मान उनके ही गृहमन्त्रित्व काल में आरम्भ किया गया था। बाद में यही सम्मान उन्हें 1947 में उनके स्वतन्त्रता संग्राम में योगदान देने, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तथा भारत के गृहमंत्री के रूप में उत्कृष्ट कार्य करने के उपलक्ष्य में राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद द्वारा प्रदान किया गया। 7 मार्च के दिन वर्ष 1961 में उनका निधन हो गया था।
जब पंत ने खुद फावड़ा चला कर स्कूल व नहर की शुरुआत
बात 1952 की है। तब पं. गोविंद बल्लभ पंत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। वह तत्कालीन अल्मोड़ा जिले के पहले ब्लाक गरुड़ (बागेश्वर) का उद्घाटन करने आ रहे थे। वयोवृद्ध गांधीवादी नेता गोपाल दत्त भट्ट बताते हैं कि जब पं. पंत की फ्लीट गरुड़ के लिए निकली तो अचानक काफिला दर्शानी गांव में रुक गया। पं. पंत गाड़ी से उतरे। उन्होंने फावड़ा पकड़ा और नहर के शिलान्यास के तौर पर जमीन पर चलाया। उन्होंने यहां एक स्कूल की भी नींव रखी, जो आज प्राथमिक विद्यालय दर्शानी के नाम से भी जाना जाता है। बिना किसी झिझक, बिना किसी गुरुर के पं. पंत की इस सादगी से हर कोई प्रभावित हुआ। आज भी दर्शानी गांव उस दौर को याद करता है। एडवोकेट डीके जोशी बताते हैं कि यहां की सिंचाई नहर व प्राथमिक विद्यालय पं. पंत की इस खास स्मृति को आज भी संजोए हुए है।
Narendra Modi Amit Shah Nitin Nabin #blsanthosh MYogiAdityanath Dharampal Singh Pankaj Chaudhary PMO India Bharatiya Janata Party (BJP) BJP Uttar Pradesh



















































